वक़्त का बंधन: एक अनन्त चक्र और परिवार के दबे हुए राज़ों की दास्तान
दिल्ली शहर की भागमभाग में, अर्जुन शर्मा (25) की सामान्य ज़िंदगी उस पल थम गई, जब उसके सामने उसकी प्रेमिका प्रिया की मौत एक भयानक सड़क हादसे में हो गई। लेकिन यह कहानी केवल दुःख की नहीं है। हर सुबह, अर्जुन की आँखें उसी दिन, उसी तारीख—15 अगस्त 2025—को खुलती हैं। यह एक ऐसा ‘वक़्त का बंधन’ है, जहाँ उसे बार-बार अपनी आँखों के सामने प्रिया को खोने का दर्द सहना पड़ता है। अलार्म की तेज़ आवाज़ अब उसके लिए सिर्फ एक घड़ी की ध्वनि नहीं, बल्कि उसके कर्मों और नियति की चेतावनी बन चुकी है। अर्जुन को जल्द ही समझ आ जाता है कि यह हादसा नहीं है, बल्कि एक जानलेवा साज़िश है, और अगर उसे इस चक्र को तोड़ना है, तो उसे अपनी ग़लती, अपने परिवार के राज़ और अपने प्यार के अनसुलझे रहस्यों को खोजना होगा। शुरुआती एपिसोड में अर्जुन केवल प्रिया को बचाने के लिए छटपटाता है, लेकिन हर नाकाम कोशिश उसे उसके घर के अँधेरों की तरफ धकेलती है। उसे पता चलता है कि उसके पिता, एक रिटायर्ड व्यवसायी, एक बड़े कर्ज़ और ब्लैकमेल के दलदल में फँस चुके हैं। उसकी छोटी बहन रिया की शादी की बात चल रही है, लेकिन लड़के वालों की माँगें सामान्य नहीं हैं। यह सब एक ही नाम से जुड़ा है—ललित वर्मा। अर्जुन का सामना उसके पिता के गुप्त लोन, रिया की मजबूरियों और प्रिया के उस आख़िरी, अस्पष्ट मैसेज से होता है। हर लूप उसे एक नया सुराग देता है, और वह एक साधारण प्रेमी से एक मज़बूत रणनीतिकार बन जाता है। अब यह लड़ाई केवल एक लड़की की जान बचाने की नहीं, बल्कि अपने परिवार के सम्मान और अस्तित्व की बन चुकी है। कहानी तब एक तूफ़ान का रूप लेती है, जब रिश्तों की परतें खुलती हैं। अर्जुन को मालूम होता है कि ललित वर्मा केवल एक ब्लैकमेलर नहीं, बल्कि एक शातिर अपराधी है, और इससे भी बड़ा रहस्य यह है कि प्रिया खुद वर्मा की बिछड़ी हुई बेटी है। यह ख़ुलासा अर्जुन को हिला देता है। वर्मा का असली मक़सद सिर्फ़ बिज़नेस नहीं, बल्कि जायदाद और विरासत से जुड़ा एक ख़ून का खेल है, जहाँ वह अपनी बेटी को मारकर, अपनी ख़ुद की ग़लतियों को दफ़न करना चाहता है। जब अर्जुन को पता चलता है कि प्रिया गर्भवती है, तो दांव और भी ऊँचे हो जाते हैं—अब उन्हें सिर्फ अपनी जान नहीं, बल्कि अपने आने वाले बच्चे के भविष्य को भी बचाना है। इमोशनल मोड़ पर, वर्मा का बेटा विक्रम, जो प्रिया का सौतेला भाई है, भी इस साज़िश का हिस्सा निकलता है। विक्रम, जो अपने पिता के कहने पर हादसे को अंजाम दे रहा है, वह भी कहीं न कहीं अपने परिवार के टूटने का ग़म पाले हुए है। अर्जुन की बहादुरी और प्रिया के अटल प्रेम से प्रेरित होकर, विक्रम के अंदर का इंसान जागता है और वह आख़िरी लूप में एक अनपेक्षित बलिदान देता है। उसका यह बलिदान एक नया रास्ता खोलता है—पुलिस का रास्ता। लेकिन क्या दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर सिंह सच में ईमानदार है, या वह भी वर्मा के पैसों के आगे झुक जाएगा? अर्जुन को एक और ख़तरा मोल लेना पड़ता है, जब वर्मा का वकील मिस्टर कपूर 'अंतिम योजना' के तहत जेल से भी इस खेल को जारी रखता है। यह लंबी लड़ाई आख़िरकार अर्जुन को उसके अपने अंदर ले जाती है। तमाम बाहरी ख़तरों को ख़त्म करने के बाद भी, जब लूप नहीं टूटता, तो एक गहन दृष्टि (Vision) में उसे अहसास होता है कि शायद यह सब उसके ‘कर्म का चक्र’ है। उसे याद आता है कि वास्तविक हादसे में उसका अपना ध्यान भटकना भी एक कारण था। अब अर्जुन को समझ आता है कि इस बंधन को तोड़ने का एकमात्र तरीका अपने परिवार, अपनी प्रेमिका और सबसे महत्वपूर्ण, ख़ुद से माफ़ी माँगना है। 'वक़्त का बंधन' एक ऐसी दास्तान है जो दर्शाती है कि जीवन में दूसरा मौक़ा हमेशा मिलता है—बशर्ते आप अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करने का साहस रखें। क्या अर्जुन अपने परिवार को फिर से जोड़ पाएगा? क्या प्रिया और उसका बच्चा सुरक्षित रहेंगे? और क्या वह अंततः 16 अगस्त का ‘नया सूरज’ देख पाएगा? इस भावनात्मक, रहस्यमय और रोमांचक ऑडिओ सीरीज़ के साथ जुड़े रहिए। हर एपिसोड आपको सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या आप अपनी ग़लतियों को सुधारने का दूसरा मौक़ा पा सकते हैं। Learnivox पर इस पूरी कहानी को सुनिए और जानिये कि कैसे प्यार और माफ़ी ने वक़्त के सबसे कठोर बंधन को भी तोड़ दिया। आपकी प्रतीक्षा यहाँ ख़त्म होती है।
Episodes
Episode 1: सुबह की शुरुआत
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Episode 2: पहला प्रयास
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Episode 3: राज़ की शुरुआत
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Episode 4: वर्मा का सच
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Episode 5: बेटियों का राज़
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Episode 6: भाई-बहन का बंधन
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Episode 7: पुलिस का दौरा
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Episode 8: अंतिम योजना
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Episode 9: कर्म का चक्र
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